Shayariii...

Shayariii...

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Shayariii...

Shayariii...

"मेरी साँसों में बिखर जाओ तो अच्छा है... बन के रूह मेरे जिस्म में उतार जाओ तो अच्छा है... किसी रात तेरी गोद में सिर रख कर सो जाऊँ मैं... उस रात की कभी सुबह ना हो तो अच्छा है.!!!"

"मेरी साँसों में बिखर जाओ तो अच्छा है... बन के रूह मेरे जिस्म में उतार जाओ तो अच्छा है... किसी रात तेरी गोद में सिर रख कर सो जाऊँ मैं... उस रात की कभी सुबह ना हो तो अच्छा है.!!!"

"ज़रूरत ही नही अलफाज़ की,  दोस्ती तो चीज़ है बस एहसास की.. पास होते तो मंज़र ही क्या होता..?  दूर से ही खबर है हमें, आपकी हर सांस की!!"

"ज़रूरत ही नही अलफाज़ की, दोस्ती तो चीज़ है बस एहसास की.. पास होते तो मंज़र ही क्या होता..? दूर से ही खबर है हमें, आपकी हर सांस की!!"

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