Rupendra Tamrakarr

Rupendra Tamrakarr

आँखों मैं बसा लो इन नज़रों को शायद कल इस से हंसी नज़ारा ना हो | रूठा ना करना अपनों से तुम शायद कल कोई जीने का सहारा ना हो | दूर मत निकलना कश्ती लेके शायद दूर तक
Rupendra Tamrakarr
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