अनछुए पल

जिऊँ तुझे "ज़िंदगी" तो कुछ इस तरह से जिऊँ......... कि मौत भी जीने का अंदाज़ मुझसे सिख जाए........
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जिऊँ तुझे "ज़िंदगी" तो कुछ इस तरह से जिऊँ......... कि मौत भी जीने का अंदाज़ मुझसे सिख जाए.....

जिऊँ तुझे "ज़िंदगी" तो कुछ इस तरह से जिऊँ......... कि मौत भी जीने का अंदाज़ मुझसे सिख जाए.....

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जिऊँ तुझे "ज़िंदगी" तो कुछ इस तरह से जिऊँ......... कि मौत भी जीने का अंदाज़ मुझसे सिख जाए.....

जिऊँ तुझे "ज़िंदगी" तो कुछ इस तरह से जिऊँ......... कि मौत भी जीने का अंदाज़ मुझसे सिख जाए.....

तेरी रूह समाई थी मुझमे, छुपाता रहा धड़कने, क्यो खुद से ही, आरजू नहीं थी तेरी,बस ... जिंदा रहा, तेरी, ख़्वाहिश लिए॥ रिश्ते न थे फूलो के, न ख़ुशबुओं के नाम के, सजाता रहा, गुलाब बेखबर, बद गुमा सा कविताओ, के लिहाफ मे... घिर आती हे बदलियाँ, तेरे किसी, नादा से खयाल से, टूटता हु, मे.... हर रात, उसी अंदाज से॥ बिखरी किरचे, समेट लूँ, किताबों से... पाकर तुझे, यूं मेरे पिघले शब्दो मे, जुड़ता हु, किसी सहर के लिए। महकता हु, खुशबू लिए, बरसता हु, प्यास लिए.... बस, तेरे लिए, तेरे लिए......

तेरी रूह समाई थी मुझमे, छुपाता रहा धड़कने, क्यो खुद से ही, आरजू नहीं थी तेरी,बस ... जिंदा रहा, तेरी, ख़्वाहिश लिए॥ रिश्ते न थे फूलो के, न ख़ुशबुओं के नाम के, सजाता रहा, गुलाब बेखबर, बद गुमा सा कविताओ, के लिहाफ मे... घिर आती हे बदलियाँ, तेरे किसी, नादा से खयाल से, टूटता हु, मे.... हर रात, उसी अंदाज से॥ बिखरी किरचे, समेट लूँ, किताबों से... पाकर तुझे, यूं मेरे पिघले शब्दो मे, जुड़ता हु, किसी सहर के लिए। महकता हु, खुशबू लिए, बरसता हु, प्यास लिए.... बस, तेरे लिए, तेरे लिए......

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