शेर ओ शायरी का हुनर,

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शेर ओ शायरी का हुनर रखते हो तो नरम लहज़े से जिगर में उतरो भी , क्या कलम को तलवार तल्खियों को जंग ए मैदान बना के रखा है ।

शेर ओ शायरी का हुनर रखते हो तो नरम लहज़े से जिगर में उतरो भी , क्या कलम को तलवार तल्खियों को जंग ए मैदान बना के रखा है ।

शेर ओ शायरी का हुनर रखते हो तो नरम लहज़े से जिगर में उतरो भी , क्या कलम को तलवार तल्खियों को जंग ए मैदान बना के रखा है ।गीली आँखों में

शेर ओ शायरी का हुनर रखते हो तो नरम लहज़े से जिगर में उतरो भी , क्या कलम को तलवार तल्खियों को जंग ए मैदान बना के रखा है ।गीली आँखों में

शेर ओ शायरी का हुनर रखते हो तो नरम लहज़े से जिगर में उतरो भी , क्या कलम को तलवार तल्खियों को जंग ए मैदान बना के रखा है ।गीली आँखों में

शेर ओ शायरी का हुनर रखते हो तो नरम लहज़े से जिगर में उतरो भी , क्या कलम को तलवार तल्खियों को जंग ए मैदान बना के रखा है ।गीली आँखों में

शेर ओ शायरी का हुनर रखते हो तो नरम लहज़े से जिगर में उतरो भी , क्या कलम को तलवार तल्खियों को जंग ए मैदान बना के रखा है ।गीली आँखों में

शेर ओ शायरी का हुनर रखते हो तो नरम लहज़े से जिगर में उतरो भी , क्या कलम को तलवार तल्खियों को जंग ए मैदान बना के रखा है ।गीली आँखों में

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शेर ओ शायरी का हुनर रखते हो तो नरम लहज़े से जिगर में उतरो भी , क्या कलम को तलवार तल्खियों को जंग ए मैदान बना के रखा है ।गीली आँखों में

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