बदगुमां न करदे ,

poetry
4 Pins106 Followers
बदगुमां न करदे कहीं मोहब्बत का मुझको सुरूर , गर ख़ुमारी में बहकूँ बढ़ के थामिए मेरे हुज़ूर ।ज़र्द पत्तों में फैली दास्तान ए इश्क़ हरसू , जो

बदगुमां न करदे कहीं मोहब्बत का मुझको सुरूर , गर ख़ुमारी में बहकूँ बढ़ के थामिए मेरे हुज़ूर ।ज़र्द पत्तों में फैली दास्तान ए इश्क़ हरसू , जो

बदगुमां न करदे कहीं मोहब्बत का मुझको सुरूर , गर ख़ुमारी में बहकूँ बढ़ के थामिए मेरे हुज़ूर ।ज़र्द पत्तों में फैली दास्तान ए इश्क़ हरसू , जो

बदगुमां न करदे कहीं मोहब्बत का मुझको सुरूर , गर ख़ुमारी में बहकूँ बढ़ के थामिए मेरे हुज़ूर ।ज़र्द पत्तों में फैली दास्तान ए इश्क़ हरसू , जो

बदगुमां न करदे कहीं मोहब्बत का मुझको सुरूर , गर ख़ुमारी में बहकूँ बढ़ के थामिए मेरे हुज़ूर ।ज़र्द पत्तों में फैली दास्तान ए इश्क़ हरसू , जो

बदगुमां न करदे कहीं मोहब्बत का मुझको सुरूर , गर ख़ुमारी में बहकूँ बढ़ के थामिए मेरे हुज़ूर ।ज़र्द पत्तों में फैली दास्तान ए इश्क़ हरसू , जो

बदगुमां न करदे कहीं मोहब्बत का मुझको सुरूर , गर ख़ुमारी में बहकूँ बढ़ के थामिए मेरे हुज़ूर ।ज़र्द पत्तों में फैली दास्तान ए इश्क़ हरसू , जो

बदगुमां न करदे कहीं मोहब्बत का मुझको सुरूर , गर ख़ुमारी में बहकूँ बढ़ के थामिए मेरे हुज़ूर ।ज़र्द पत्तों में फैली दास्तान ए इश्क़ हरसू , जो

Pinterest
Search