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परवीन शाकिर का जन्म 24 नवंबर 1952 को ‘ कराची ’ पाकिस्तान में हुआ था परवीन शाकिर शुरू में 'बीना' के उपनाम से ग़ज़ल-नज़्में लिखती थी, उन्होंने बाद में ‘सद बर्ग’ ‘खुद कलामी’ ’इनकार’ और ‘माह-ए-तमन्ना’ आदि किताबें लिखी. पहली पुस्तक ‘खुशबू’ को ADAMJEE पुरस्कार से समान्नित किया गया था उनको The Pride of Performance award दिया गया जोकि पाकिस्तान दुवारा दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार कहा जाता है.आधुनिक उर्दू शायरी की दुनिया ने 26 दिसम्बर 1994 को एक सड़क हादसे मे अपनी इस अज़ीम शायरा को खो दिया..

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Na koee khwab hamare haiN,na tabeerein haiN hum to pani pe banaee huee tasvrerien haiN -Qateel Shifai

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Angdai bhee wo lane Na paye,utha ke hath dekha jo mujhe to chhod diye,muskura ke hath -Nizam Rampuri

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Paida koee rahi, koee rahbar naheeN hota be husn-e-amal koee bhee rahbar naheeN hota un khana-badashon ka wataN sara jahaN hai jin khana-badoshon ka koee ghar naheeN hota -Anwar Jalalpuri

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असरार-उल-हक़-मजाज़ जिनको ‘मजाज़ लखनवी’ के नाम से भी जाना जाता है, मजाज़ रूमानी और क्रांतिकारी शायरी के शायर रहें, उनका जन्म उत्तर प्रदेश के ज़िला फैजाबाद में 19 अक्टूबर 1911 को हुआ था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ‘लखनऊ’ और ‘सेंट जॉन कॉलेज’ आगरा से प्राप्त करने के बाद ‘अलीगढ यूनिवर्सिटी’ उत्तर प्रदेश से स्नातक की डिग्री प्राप्त की. थे,5 दिसम्बर 1955 को ज्यादा शराब पीने के कारण मजाज़ का लालाबाग़ लखनऊ में देहांत हो गया. उनको निशातगंज लखनऊ में दफनाया गया:

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Ek barq sare toor hai lahraee huee si dekha tere honton pe hansi ayee huee si -Fani Badayuni

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बेकल उत्साही पद्मश्री की उपाधि से सम्मानित बेकल उत्साही जी ( मोहम्मद शफी खान ) का जन्म 1 जून 1928 को ज़िला बलरामपूर उत्तर प्रदेश में एक पठान परिवार में हुआ। माजिक सौहार्द एवं आपसी भाईचारे का संदेश भी लोगों तक पहुँचाने का कार्य किया। उर्दू अदब के अज़ीज़ शायर जनाब बेकल उत्साही साहब का दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 3 दिसम्बर 2016 को देहांत हो गया.

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Main aandhiyon ke paas talash-e-aiba meiN hoon tum mujhse poochte ho mera hausla hai kya -Ada Jafri

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Wo jo mere qareeb se hans kar guzar gaye kuchh khaas dostoN ke bhi chehre utar gaye -Musheer Jhinjhaanvi

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Shab jo dil be-qarar tha kya tha kisi ka iNtezar tha kya tha dekh mujh ko jo bazm se tu utha kuch tumhein mujhse aar* tha kya Aar*-Sharm,Haya -Qaeem Chandpuri

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